Wednesday, 12 April 2017

आस्था के सवाल पर सख्त नीतियों की दरकार

हिंदु दर्शन के तहत रिश्तों मे सबसे ऊंचा स्थान हमने मां को दिया है और यही भावना हमारी गंगा, गाय और जमीन से जुडी है । हम इन तीनों को मां से संबोधित करते हैं । गंगा मां का पावन जल, गाय माता का अमृत समान दूध और धरती मां से उपजा अन्न हमारे जीवन का आधार है । लेकिन हम कितने दुर्भाग्यशाली रहे हैं कि जिस गाय को हम माता समान मानते हैं उसका वध और मांस की बिक्री पर कभी शर्मिंदगी महसूस नही करते ।

                शायद ही दुनिया को कोई ऐसा देश होगा जहां उनके धर्म के विरूध्द ऐसा काम किया जाता हो । लेकिन यहां करोडों हिंदुओं की आस्था के साथ यह भद्दा मजाक बदस्तूर जारी रहा और इसका शर्मनाक पहलू यह भी रहा है कि हमने कभी एक स्वर से इसका मुखर विरोध दर्ज किया भी नही । सच तो यह है कि हम उन अभागों मे से हैं जो अपनी गो माता की रक्षा तो नही कर सके लेकिन भारत माता, गंगा मैय्या, और गाय माता के जयकारे लगाते नही अघाते । इस पाखंड्पूर्ण व्यवहार के लिए हमारी आने वाली पीढियां जो शायद हमसे ज्यादा विवेकशील होंगी, कभी माफ नही करेंगी ।

                रही बात हमारे हुक्मरानों की तो जिस देश की सरकारें और राजनेता अपने ही देश के करोडों लोगों की आस्था को वोटों की राजनीति के हाथों गिरवी रखें उनके इतिहास और  चरित्र को समय लिखेगा । लेकिन तमाम राजनीतिक विचारों की भिन्नता के बाबजूद इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए कि उत्तर प्रदेश मे योगी सरकार ने गो-वध को रोकने के लिए ठोस सार्थक कदम उठाये हैं । सभी गैर कानूनी बूचडखानों को बंद किया जा रहा है । गो हत्या पर यह  सख्त रवैया  बहुत पहले  ही अपनाया जाना चाहिए था    ।

  अब रही बात अल्पसंख्यक समुदाय की तो  उन्हें भी करोडों हिंदुओं की आस्था और धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखते हुए इस कदम के समर्थन मे स्वंय आगे आना चाहिए । यह उनके लिए भी एक सुअवसर है अपनी सह्र्दयता प्रकट करने का । यहां यह सवाल भी तर्क संगत है कि जिस देश मे बहुअसंख्यक करोडों लोगों की धार्मिक आस्था गाय से जुडी हो, वहां एक समुदाय दवारा उसका बध करना कितना सही व मानवीय है ।



                निसंदेह  विकास और समृध्दि के वह दावे और नारे खोखले हैं जो अपनी ही धार्मिक आस्थाओं की कब्र खोद कर अर्जित किए जाएं ।समय चक्र के साथ  देश और सभ्यताएं भी काल का ग्रास बनती हैं लेकिन जब कभी हमारी भावी पीढियां हमारे इस कालखंड के इतिहास को लिखें तो शर्मिंदा न हों ।  इसलिये गो वध को रोकने की मुहिम सिर्फ कुछ प्रदेशों तक सीमित नही रहनी चाहिए बल्कि गो रक्षा के लिए पूरे देश के लिए एक सख्त कानून बनाया जाना चाहिए ।